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छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ और उसके सप्त सिद्धांत


छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ


  • छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ के संथापक संत गुरु घसीदास जी हैं। उतरप्रदेश राज्य के बाराबंकी जिले के संत जगजीवन दास से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ में सतनाम पंथ की को छत्तीसगढ़ में प्रचलित किया।
सतनाम-पंथ


  • गुरु घासीदास जी का जन्म 18 दिसंबर 1756 में छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के गिरौध नामक ग्राम में हुआ था। 

  • गुरु घासीदास को ज्ञान की प्राप्ति छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के सारंगढ़ तहसील में (बिलासपुर रोड वर्तमान) में मंदिर स्थित एक पेड़ के नीचे तपस्या करते समय प्राप्त हुआ।

  • उस स्थान पर बैठ कर वे सतनाम (ईश्वर) का चिंतन किया करते थे। धीरे-धीरे गुरु घासीदास के चमत्कारों को देख कर लोग उनके अनुयायी बनने लगे और लोगों ने उन्हें संत के पद पर आसीन कर दिया। 

  • गुरु घासीदास ने अपने अनुयायियों को अपने सिद्धांतों की शिक्षा दी, जिसे उनके अनुयाई वेद वाक्य मानते हैं। 



सतनाम धर्म के सप्त सिद्धांत इस प्रकार हैं :-

  1. सतनाम को मनो। सत्य ही ईश्वर है। सत म धरती सत म आकाश। 
  2. सभी जीव सामान है। जिव हत्या पाप है। पशु बलि अंध-विश्वास है। 
  3. मांसाहार मत करो। जीव हत्या पाप है। 
  4. मूर्ति पूजा मत करो। 
  5. दोपहर में खेत मत जोतो। 
  6. पर नारी को माता मानो। आचरण की शुद्धता पर जोर दो। 
  7. चोरी करना पाप है। हिंसा करना पाप है। जीवन में सदा उच्च विचार रखो। 




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